{"product_id":"chauraha","title":"Chauraha","description":"यह नाटक हिन्दी नाट्य साहित्य की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला नाटक है। इसका कथ्य यथार्थपरक है यथा- \"राजनीति अब योग्यतम की रक्षा वाली नहीं अपितु अयोग्य ही सत्ता धारक व कर्णधार है। आखिर जीवन का अर्थ खोजने वाला साहित्यकार अपने आप को राजनीति के महत्वपूर्ण प्रश्नों से कहाँ तक असंपृक्त रख पाता।' राजनीति और समाज अन्योन्याश्रित है यदि राजनीति जायेगी तो समाज अवश्य पथ भ्रष्ट हो जायेगा। इस कथ्य को बड़ी बारीकी से नाटककार ने उकेरा है। रही नाट्यकला की बात, तो यह स्पष्ट है कि यह नाटक पुरानी परम्पराओं एवं वर्जनाओं को तोड़ता है। लेकिन शिल्प की बारीकियों को आत्मसात करता है।","brand":"True Sign Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":53593993773335,"sku":"9789354627330","price":103.95,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0679\/6918\/8119\/files\/3530123.webp?v=1782802025","url":"https:\/\/payment.letskitaboo.com\/ur\/products\/chauraha","provider":"Kitaboo One eStore","version":"1.0","type":"link"}