गार्गी
अदम्य, अटूट अस्तित्व
गार्गी की कहानी प्रियंका के नाम उसकी 9 साल की उम्र से शुरु होती है। इसी छोटी सी उम्र में जिस पड़ोस की मौसी को उसने अपनी मां माना उसको उसने अपने ही पिता के साथ हमबिस्तर देखा।
गार्गी को सहारा मिला जब समीर उसके जीवन मे आया। कुछ दिन में उसे पता चल गया वो समीर का प्यार नहीं उसकी ज़िद थी।
टूटते रिश्ते को बचाने के लिए वो किया जो किसी ने सोचा नहीं था। पर सब हुआ बेकार ...
गार्गी ने हार नहीं मानी, लड़ती रही ।
उसको एक ऐसा कदम उठाना पड़ा जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था..
क्या गार्गी अपने जख्मों को अपनी मेहनत के मरहम से भर पाई?
या फिर निकल पड़ी एक ऐसी राह पर जिसकी किसी को उम्मीद ना थी ... क्या होंगे उसके सपने पूरे ...?
